लॉकडाउन में परीक्षा:आशीष Kr. उमराव "पटेल", कैरियर & एकेडेमिक मेंटोर, स्पीकर, मोटीवेटर

लॉकडाउन में परीक्षा
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लॉकडाउन में परीक्षाओं को लेकर बच्चे परेशान हैं, मौजूदा हालात में सीबीएसई की 10वीं और 12वीं की बची हुई परीक्षाएं कराना अब संभव नहीं हो पाएगा, लिहाजा इंटरनल एग्जाम्स के आधार पर ही बच्चों को पास किया जाए, जैसा 9वीं और 11वीं के बच्चों के साथ किया गया है। अगले वर्ष के लिए समूचे पाठ्यक्रम में कम से कम 30 फीसदी की कमी की जाए और जेईई, नीट तथा अन्य उच्च शिक्षा संस्थानों की प्रवेश परीक्षाएं भी इस कम किए गए पाठ्यक्रम के आधार पर ही ली जाएं। खासकर 12वीं के अधर में लटके छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी। दरअसल, कोरोना संकट ने पढ़ाई-लिखाई और परीक्षाओं की पूरी लय ही बिगाड़ दी है। भारत में कोरोना के कारण लॉकडाउन का फैसला तब किया गया जब परीक्षाएं अपने अंतिम दौर में थीं।
लॉकडाउन के कारण बचे हुए कुछ पेपर्स स्थगित करने पड़े। अब चूंकि लॉकडाउन हटने की तिथि को लेकर कुछ भी निश्चित नहीं है इसलिए परीक्षाओं का मामला भी अनिश्चित बना हुआ है। कभी कहा जा रहा है कि परीक्षाएं ली जाएंगी तो कभी यह कि बचे हुए विषयों में औसत अंक दे दिए जाएंगे। बीच में यह चर्चा भी चली कि बची हुई परीक्षाएं ऑनलाइन ली जाएंगी।
इस दुविधा से बच्चे बहुत परेशान हैं। वे समझ नहीं पा रहे कि वे इन विषयों की अपनी तैयारी जारी रखें या इस दबाव से मुक्त होकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर फोकस करें। अभी जो हालात हैं, उनमें सरकार भी उन्हें कोई आश्वासन देने की स्थिति में नहीं है, क्योंकि स्थितियां कब सामान्य होंगी, कोई नहीं जानता। इस बीच पिछले सेशन का समय समाप्त हो चला है, लिहाजा बेहतर यही होगा कि परीक्षा न ली जाए और आंतरिक परीक्षा के आधार पर नंबर दे दिए जाएं। इस तरह के किसी फैसले तक पहुंचने में और देर करना ठीक नहीं है।
दसवीं-बारहवीं में पढ़ने वाले बच्चों का मन कुछ ज्यादा ही संवेदनशील होता है। छोटी-छोटी बातें भी इस उम्र में उन्हें बहुत प्रभावित करती हैं। वे इस समय अपने भविष्य को लेकर काफी चिंतित रहते हैं। ज्यादा लंबी अनिश्चिचतता उनके मन-मस्तिष्क पर गलत प्रभाव डाल सकती है। वैसे भी मौजूदा संकट से बच्चे बहुत परेशान हैं। अर्थव्यवस्था और रोजी- रोजगार के क्षेत्र से आ रही नकारात्मक खबरें उन्हें निराश कर रही हैं। मान लिया जाए कि कुछ दिनों में हालात सुधर गए तो भी लंबे समय तक खाली बैठने के बाद अचानक फिर से परीक्षा देने में वे सहज नहीं महसूस कर पाएंगे। सिलेबस में ढील देने का सुझाव भी बेहद अहम है। विपरीत परिस्थितियों में पैदा मानसिक दबाव को देखते हुए स्टूडेंट्स को थोड़ी राहत जरूर दी जानी चाहिए। आशा है कि सरकार और बोर्ड इस बारे में जल्दी कोई निर्णय करेंगे।
~आशीष Kr. उमराव "पटेल", कैरियर & एकेडेमिक मेंटोर, स्पीकर, मोटीवेटर, निदेशक- गुरु द्रोणाचार्य (IIT-JEE, NEET & NDA इंस्टिट्यूट), फ़ोन & व्हाट्सप्प-8650030001, like, follow / subscribe me on-facebook, instagram, twitter, linkedin & youtube.